बछरावां, रायबरेली स्थित उत्कर्ष पब्लिक इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के नियंत्रणाधीन संचालित त्रैमासिक पौरोहित्य प्रशिक्षण शिविर में मुझे प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं देने का अवसर प्राप्त हुआ है। 21 सितंबर 2026, सोमवार से प्रारंभ हुए इस त्रैमासिक प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ना मेरे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मेरे गृहजनपद रायबरेली में संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान-परंपरा, वैदिक विधि-विधान, पौरोहित्य परंपरा, कर्मकांड तथा ज्योतिष जैसे विषयों के प्रचार-प्रसार और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। संस्कृत भारतीय संस्कृति, दर्शन, वेद-वेदाङ्ग, धार्मिक साहित्य, संस्कार-पद्धति और शास्त्रीय परंपराओं की महत्वपूर्ण आधारभूत भाषा रही है; अतः संस्कृत के अध्ययन को केवल भाषा-अध्ययन तक सीमित न रखकर उसे भारतीय जीवन-पद्धति एवं वैदिक परंपरा के व्यवहारिक पक्ष से जोड़ना इस प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इस त्रैमासिक शिविर के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को पौरोहित्य कार्य की विभिन्न विधियों, वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, संस्कारों एवं धार्मिक अनुष्ठानों की शास्त्रीय प्रक्रिया, संकल्प-विधान, पूजन-पद्धति, कर्मकांड के मूल सिद्धांत तथा ज्योतिष संबंधी आवश्यक विषयों का अध्ययन और अभ्यास कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि वे परंपरा को केवल कर्मकांडीय प्रक्रिया के रूप में न देखकर उसके पीछे निहित शास्त्रीय, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि को भी समझ सकें। मेरे लिए यह अवसर इसलिए भी विशेष है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग में शोधार्थी के रूप में संस्कृत और भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े अध्ययन के साथ-साथ अपने गृहक्षेत्र में उसी ज्ञान-परंपरा के प्रसार के लिए प्रत्यक्ष रूप से कार्य करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। मेरा प्रयास रहेगा कि प्रशिक्षणार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, वैदिक परंपराओं के प्रति समझ, शास्त्रीय विधि-विधान के प्रति गंभीरता तथा भारतीय संस्कृति के प्रति आत्मीय दृष्टिकोण विकसित हो और वे प्राप्त ज्ञान का समाजोपयोगी एवं मर्यादित रूप से प्रयोग कर सकें। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा संचालित यह त्रैमासिक पौरोहित्य प्रशिक्षण शिविर संस्कृत भाषा और भारतीय वैदिक परंपरा को जनसामान्य तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रयास है। इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक के रूप में सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए मैं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ तथा सभी संबंधित अधिकारियों एवं प्रशिक्षण केंद्र के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि आगामी तीन महीनों में होने वाला यह प्रशिक्षण संस्कृत, वैदिक विधि-विधान, पौरोहित्य, कर्मकांड एवं ज्योतिष के अध्ययन के प्रति प्रशिक्षणार्थियों में नई रुचि और जागरूकता उत्पन्न करेगा तथा अपने गृहजनपद रायबरेली में भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध होगा।
त्रैमासिक प्रशिक्षण शिविर
बछरावां से वैदिक परंपरा के संवर्धन की नई पहल
Research Published on September 22, 2026