बछरावां, रायबरेली। भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के नियंत्रणाधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की ओर से संचालित त्रैमासिक पौरोहित्य प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को उत्कर्ष पब्लिक इंटर कॉलेज, बछरावां, रायबरेली में शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य प्रतिभागियों को पौरोहित्य कर्म, वैदिक विधि-विधान एवं संस्कृत परंपरा से संबंधित व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करना है।
उद्घाटन के अवसर पर प्रशिक्षुओं को पौरोहित्य की विभिन्न विधियों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा संस्कृत भाषा एवं वैदिक परंपरा के महत्व से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-विधि, विभिन्न संस्कारों तथा धार्मिक कर्मकांड का विधिवत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण शिविर का आयोजन उत्कर्ष पब्लिक इंटर कॉलेज, बछरावां में किया जा रहा है। शिविर के निदेशक प्रेमेन्द्र कुमार गुप्त (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ) हैं। प्रशिक्षण केंद्र के संस्थापक श्री भगवान कुमार अवस्थी, प्रधानाचार्य श्री अभिनव अवस्थी तथा पौरोहित्य प्रशिक्षक आचार्य सत्यम पाण्डेय हैं।
आयोजक मंडल के अनुसार, इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को पौरोहित्य से जुड़े धार्मिक कर्मकांड, वैदिक विधि-विधान एवं संस्कृत परंपराओं का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा, जिससे वे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं संस्कारों को शास्त्रीय विधि के अनुसार संपन्न करने की प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित हो सकें।
उद्घाटन के अवसर पर प्रशिक्षुओं को पौरोहित्य की विभिन्न विधियों, धार्मिक अनुष्ठानों तथा संस्कृत भाषा एवं वैदिक परंपरा के महत्व से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-विधि, विभिन्न संस्कारों तथा धार्मिक कर्मकांड का विधिवत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण शिविर का आयोजन उत्कर्ष पब्लिक इंटर कॉलेज, बछरावां में किया जा रहा है। शिविर के निदेशक प्रेमेन्द्र कुमार गुप्त (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ) हैं। प्रशिक्षण केंद्र के संस्थापक श्री भगवान कुमार अवस्थी, प्रधानाचार्य श्री अभिनव अवस्थी तथा पौरोहित्य प्रशिक्षक आचार्य सत्यम पाण्डेय हैं।
आयोजक मंडल के अनुसार, इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से प्रतिभागियों को पौरोहित्य से जुड़े धार्मिक कर्मकांड, वैदिक विधि-विधान एवं संस्कृत परंपराओं का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा, जिससे वे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं संस्कारों को शास्त्रीय विधि के अनुसार संपन्न करने की प्रक्रिया से भली-भाँति परिचित हो सकें।